Apke Lekh

Mr. Nandlal Vishwakarma
Mr. Nandlal Vishwakarma mailbox4nandlal@gmail.com 9819381626
Subject : हमने अपने हाथों में जब

हमने अपने हाथों में जब धनुष सँभाला है,
बाँध कर के सागर को रास्ता निकाला है।
हर दुखी की सेवा ही है मेरे लिए पूजा,
झोपड़ी गरीबों की अब मेरा शिवाला है।
अब करें शिकायत क्या,...

Mr Sharad Vishwakarma
Mr Sharad Vishwakarma mr.sharadkumar01@rediffmail.com 9696073355
Subject : Perception

A lovely mail on perception...

The Situation

In Washington, DC, at a Metro Station, on a cold January morning in 2007, this man with a violin played six Bach pi...

Mr Amarjeet Thakur
Mr Amarjeet Thakur amarjeet_thakur2001@yahoo.com 9990529741
Subject : Maut ke baad mera haal...

Tha Main Neend Mein Aur Mujhe Itna Sajaya Jaa Raha Tha,
Bade Hi Pyaar Se Mujhe Nahlaya Jaa Raha Tha.

Na Jaane Tha Wo Kaun Sa Ajab Khel Mere Ghar Mein,
Bachchon Ki Tarah ...

Mr. Vinod Kumar Sharma Khudaniya
Mr. Vinod Kumar Sharma Khudaniya khudaniya.vinod@gmail.com 9785022587
Subject : ईश्वर अंश जीव अविनाशी, चेतन अमल सहज सुख राशि

हे नाथ मैँ आपको भूलूँ नही...।।

ईश्वर अंश जीव अविनाशी, चेतन अमल सहज सुख राशि ।

ईश्वर के अंश होने के कारण हम परम आनंद को पाने के अधिकारी हैं, चेतना के उस दिव्य स्तर तक पहुंचने के अधिक...

Mr. Nandlal Vishwakarma
Mr. Nandlal Vishwakarma mailbox4nandlal@gmail.com 9819381626
Subject : आईना

देखती हूँ हर रोज़, आईने में अपने आप को
खुश होती हूँ देखकर बाहरी रूप
इतने अरसो बाद भी
वैसा ही है, मुस्कुराता, महकता
तसल्ली सी होती है, पर अधूरी सी...

पूछ लेती ह...

Mr. Nandlal Vishwakarma
Mr. Nandlal Vishwakarma mailbox4nandlal@gmail.com 9819381626
Subject : नारी तुझ पर संसार गर्विता

तन चंचला, मन निर्मला
व्यवहार कुशला, भाषा कोमला
सदैव समर्पिता|

नदिया सा चलना, सागर से मिलना
खुद को भुलाकर भी, अपना अस्तित्व सभलना
रौशन अस्मिता|

सृष्टि...

Mr Amarjeet Thakur
Mr Amarjeet Thakur amarjeet_thakur2001@yahoo.com 9990529741
Subject : Humara Bachpan

Woh bhi kyaa din the,
"MAA" ki godh aur,
"PAPA" ke kandhe,
Na Paise ki soch,
Na life le funde,
Na kal ki chinta,
Na future ke sapne.

Ab kal ki ha...

Mr DINESH SUTHAR
Mr DINESH SUTHAR dsuthar.vgs@gmail.com 8769475707
Subject : मानवता आज बैठी है हारी

कुछ जो दूजों से अधिक समर्थ, पापी अट्टाहस करते घूम रहे!
सहमी हुई है हर सुकुमारी, मानवता आज बैठी है हारी!!

रिश्तों का मतलब रहा नहीं, नारी ने क्या-क्या सहा नहीं!
असंख्य रूप धरे...

Mr DINESH SUTHAR
Mr DINESH SUTHAR dsuthar.vgs@gmail.com 8769475707
Subject : हर तारे का एक तारा साथी

गिन-गिन देखे हमनें तारे,
पूरब से पश्चिम तक सारे,
मिला नहीं पर कोई भी ऐसा,
हो ना जिसका एक तारा साथी,
हर तारे का एक तारा साथी.

आँख-मिचौली का यह खेल,
बस बह...

Mr DINESH SUTHAR
Mr DINESH SUTHAR dsuthar.vgs@gmail.com 8769475707
Subject : Beti

Pariyon Ka Roop Hai,
Paawan Si Dhoop Hai.

Ek Thandi Hawa Ka Jhonka Hai,
Har Taap Ko Jisne Sokha Hai.

Bhor Ka Ujera Hai,
Chidiyon Ka Basera Hai.

Pa...

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