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Mr. रजनीश  मार्तण्ड
Mr. रजनीश मार्तण्ड rajneeshmartand@gmail.com 9455502007
Subject : त्वष्ट्र पैटरे
त्वष्ट्र पैटरे, जिसे त्वश्तर पैटरे (Tvashtar Paterae) भी उच्चारित करते हैं, (इसका नाम त्वष्ठा विश्वकर्मा नामक हिन्दू ऋग्वैदिक देवता पर रखा गया है जो लोहारों के अधिदेवता माने जाते हैं) गैलिलेयो (Galileo) अमेरिकी अंतरिक्ष अनुसन्धान संस्था नासा का एक अंतरिक्ष यान था जो हमारे सौर मंडल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति और उसके प्राकृतिक उपग्रहों का अध्ययन करने के लिए १८ अक्टूबर १९८९ को पृथ्वी से रॉकेट के ज़रिये छोड़ा गया यह यान यह परिक्रमा करता ऑर्बिटर प्रकार का था और ७ दिसम्बर १९९५ को बृहस्पति पहुँच गया।वहां से जानकारियां प्रसारित करता रहा जिसके अनुसार बृहस्पति ग्रह के चंद्रमा आयो पर स्थित एक ज्वालामुखीय क्षेत्र है। यह उस चंद्रमा के उत्तरी ध्रुव के पास स्थित है और इसमें ज्वालामुखीय क्रेटरों की एक शृंखला मौजूद है। इसका नाम त्वष्ट्र पैटरे अर्थात (त्वष्ठा विश्वकर्मा) नामक हिन्दू ऋग्वैदिक देवता पर रखा गया है जो लोहारों के अधिदेवता माने जाते हैं।और जिन्होंने विश्व का निर्माण किया ।गैलिलेयो (अंतरिक्ष यान) ने कई सालों तक इस क्षेत्र का अध्ययन किया था जिस दौरान यहा एक स्थल से एक २५ किलोमीटर चौड़ी दरार से लावा फटा जो सतह से १ से २ किमी की ऊँचाई तक पहुँच गया। देखने में यह एक २५ किमी चौड़े और १-२ किमी ऊँचे परदे जैसा लगा। कुछ समय बाद यहाँ एक गैस का फ़व्वारा फटा जो सतह से ३८५ किमी की ऊँचाई तक पहुँच गया और जिसकी सामग्री विस्फोट स्थल से ७०० किमी दूर तक के स्थानों को ढक गई। विश्व की सबसे बड़ी रिसर्च लैब (नासा)भी भगवान् त्वष्टा विश्वकर्मा के नाम को पूजती है मगर हमारा देश उन्हें याद तक नहीं करता और भगवान् त्वष्टा विश्वकर्मा वंशजों की अवहेलना करने पर उतारू है। नोट-किसी भी भाई को किसी प्रकार की शंका हो समाधान के लिए संपर्क अवश्य करें रजनीश मार्तण्ड राष्ट्रीय सचिव विश्व विकास सुरक्षा दल 9455502007
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