व्यायाम

शारीरिक व्यायाम वह गतिविधि है जो शरीर को तंदरुस्त रखने के साथ व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य को भी बढा़ती है। यह कई अलग अलग कारणों के लिए किया जाता है, जिनमे शामिल हैं: मांसपेशियों को मजबूत बनाना, हृदय प्रणाली को सुदृढ़ बनाना, एथलेटिक कौशल बढा़ना, वजन घटाना या फिर सिर्फ आनंद के लिए। लगातार और नियमित शारीरिक व्यायाम, प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देता है और हृदय रोग, रक्तवाहिका रोग, टाइप 2 मधुमेह और मोटापा जैसे समृद्धि के रोगों को रोकने में मदद करता है यह मानसिक स्वास्थ्य को सुधारता है और तनाव को रोकने में मदद करता है। बचपन का मोटापा एक बढ़ती हुई वैश्विक चिंता का विषय है और शारीरिक व्यायाम से बचपन के मोटापे के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

 

किस उम्र में कैसा व्यायाम

अगर आपको हाल ही में फिट और स्वस्थ रहने का जोश जागा है तो व्यायाम के दौरान कुछ करने और न करने वाली बातों की जानकारी जरूर रखिए। अगर आप बगैर जाने या विशेषज्ञ की सलाह लिए व्यायाम करते हैं तो शरीर को फायदा कम और नुकसान ज्यादा पहुंचाएंगे। हर उम्र के लोगों के लिए व्यायाम करने का तरीका और समय अलग होता है।

 

कॉलेज छात्र आयु-16-21 वर्ष

कॉलेज जाने वाले ज्यादातर छात्र व्यायाम शुरू करते वक्त बॉडी बिल्डर बनने की ख्वाहिश रखते हैं। जबकि इस उम्र में हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के सही विकास पर ध्यान देना जरूरी है। खुद को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए कराटे, रग्बी, फुटबॉल या पर्वतारोहण सबसे अच्छा व्यायाम है। इससे दिमाग की भी एक्सरसाइज हो जाती है, जिसका फायदा पढ़ाई में मिलता है। न करें-जरूरी न हो तो 18 वर्ष की उम्र के पहले जिम न जाएं, यह शरीर को बुरे शेप में भी ला सकता है। मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए ढेरों वजन उठाने के बजाए संतुलित वजन से शुरुआत करें, ताकि आप इस वजन को बार-बार उठा भी सकें। व्यायाम का समय लगभग 45 मिनट।

 

नौकरीपेशा आयु-20-30 वर्ष

इस उम्र तक आते-आते शरीर का विकास पूरा हो चुका होता है। इसलिए इस वक्त सेहत को सहेजने का प्रयास करना चाहिए। ‘मिड लाइफ’ के लिए शरीर के उपापचयी तंत्र को बेहतर बनाने की कोशिश करें। तनाव को कम करने के लिए योगा, किक बॉक्सिंग या रस्सी कूदने का सहारा लें। गर्दन, पैर, पीठ और पेट के निचले हिस्से पर ज्यादा ध्यान दें। न करें-इस उम्र तक आते-आते ज्यादातर लोगों को अपने शरीर की खूबियों और कमजोरियों की जानकारी हो चुकी होती है। इसलिए मोटे हाथ या भारी कमर को कम करने के अथक प्रयास विशेषज्ञ की सलाह से ही शुरू करें। व्यायाम का समय 45 मिनट से एक घंटा।

 

नई-नई मम्मा आयु-25-30 वर्ष

कोशिश यह होनी चाहिए कि गर्भावस्था से पहले अगर आप फिट रही हांे तो दोबारा फिर उसी आकार में आ जाएं। नई मम्मा को डॉक्टर की अनुमति के बाद ही व्यायाम शुरू करना चाहिए। आप वर्क आउट को योगा के साथ मैच कर सकती हैं। स्तनपान के दौरान बाजरा, सोया और दही का ज्यादा से ज्यादा सेवन करें। न करें-इस वक्त डाइटिंग से तौबा करें, लेकिन दो के लिए खाने वाली मानसिकता को छोड़ दें। व्यायाम का समय 15-30 मिनट मुफीद रहेगा।

 

40 या उससे ज्यादा उम्र

सेहत को बेहतर बनाए रखने के प्रयास करें। उम्र बढ़ना स्वाभाविक प्रक्रिया है, इसलिए यह बढ़ेगी लेकिन अच्छी जीवन शैली, व्यायाम और उचित खान-पान से आप इसे दुरुस्त रख सकते हैं। इस समय आप तेज चाल में वॉक करने को नियमित करें और स्विमिंग को अपनाएं। स्ट्रैचिंग भी काफी काम आती है, योगा इस उम्र के लिए बिलकुल सही है। न करें-इस उम्र में मॉडल्स जैसे शरीर की कामना न करें, ऐसा व्यायाम अपनाएं जिससे शरीर चुस्त रहे। कराटे से दूर रहना ही बेहतर है। व्यायाम का समय 30-45 मिनट।

 

व्यायाम करने से पहले

एक्सरसाइज वही फायदेमंद होती है, जो आपका हल्कापन दे और आपकी कार्यक्षमता बढ़ाए।

वह शारीरिक चेष्टा जो मनोनुकूल हो, शरीर में स्थिरता उत्पन्न करती हो एवं बल को बढ़ाने वाली हो उसे व्यायाम कहा जाता है। इस तरह एक मजदूर के द्वारा किए गए कार्य एवं एक रिक्शा चलाने के कार्य को व्यायाम नहीं कहा जा सकता।

उचित व्यायाम करने से शरीर में हल्कापन आता है, काम करने की क्षमता में वृद्धि होती है, शरीर दृढ़ होता है। किसी भी प्रकार से उत्पन्न तनाव को सहने की शक्ति में वृद्धि होती है। दोषों का क्षय होता है, जठराग्नि ठीक होती है ,जिससे भूख ठीक लगती है।

व्यायाम तब तक करना चाहिए जब शरीर में पसीना आना, श्वास गति में वृद्धि एवं शरीर में हल्कापन जैसे लक्षण उत्पन्न हो जाए। अगर व्यायाम अधिक मात्रा में किया जाए तो शारीरिक थकावट, प्यास का अधिक लगना, श्वास रोग, कास रोग, बुखार तथा उल्टी आना जैसे विकार उत्पन्न हो जाते हैं। बालक, वृद्ध, वात प्रकृति वाले, अधिक भार ढोने वाले, अधिक पैदल चलने से जिनका शरीर कृश हो गया हो, क्रोध, भय, थके हुए शरीर वाले, भूख एवं प्यास से युक्त वाले को व्यायाम नहीं करना चाहिए।

वसन्त ऋतु एवं हेमन्त ऋतु में व्यायाम करना उचित है लेकिन ग्रीष्म और वर्षा ऋतु में व्यायाम नहीं करना चाहिए। जो व्यक्ति नित्य व्यायाम करते हैं उन्हें स्नेह का अर्थात् घी तेल का सेवन भी करना चाहिए। व्यायाम न करने से मधुमेह जैसे रोग उत्पन्न होते हैं, जबकि अतिमात्रा में किया गया व्यायाम वातज ह्वदय रोग उत्पन्न करता है। व्यायाम न करने से व्यक्ति अतिस्थूल हो जाता है और अतिस्थूल होने के उपरान्त व्यायाम न सहने से स्वेद की अतिप्रवृत्ति होती है। कफज रोगों की चिकित्सा के अन्तर्गत व्यायाम का निर्देश है। व्यायाम न करने से कफज शोथ की उत्पत्ति होती है। व्यायाम न करना अतिकृश व्यक्ति की चिकित्सा है। लंघन के दस प्रकारों के अन्तर्गत व्यायाम भी एक प्रकार है। जिस व्यक्ति को नींद अधिक आती है उसके लिए व्यायाम एक चिकित्सा है। व्यायाम को संतर्पण जन्य रोगों की चिकित्सा बताया है।

अति व्यायाम से उत्पन्न क्षोभ के कारण दोष कोष्ठ से रस रक्तादि धातुओं में चले जाते हैं। चरक संहिता में अतिव्यायाम से होने वाली हानि का दर्शाने के लिए इसकी तुलना उस सिंह के साथ की है जो अपनी क्षमता से अधिक कार्यकर हाथी को खींच कर नष्ट हो जाता है।

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