उच्चतर शिक्षा

प्राचीन काल से भारत उच्चखतर शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृअष्ट।ता का एक केंद्र रहा है। नालंदा, विक्रमशीला तथा तक्षशीला विश्वी के कुछ सबसे प्राचीन विश्व्विद्यालय हैं तथा अपने समय में उच्च तर शिक्षा के सर्वाधिक प्रतिष्ठित स्थाल थे। दूरदराज के देशों से विद्यार्थी इन विश्वकविद्यालयों में शिक्षा प्राप्ते करने वाले थे। आज भारत में विश्वर की एक सबसे बड़ी उच्चशतर शिक्षा प्रणाली है तथा यहाँ उच्चलतर शिक्षा की कुछ विश्वर स्तजरीय संस्थाठएं भी हैं।

उच्चबतर शिक्षा की वर्तमान प्रणाली की शुरुआत 1823 में माउंट स्टुकअर्ट एल्फिन स्टो न के कार्यवृत्त से हुई जिसमें अंग्रेज़ी तथा यूरोपीय विज्ञानों के अध्याीपन के लिए विद्यालय स्थाापित करने पर जोर दिया गया। तदनंतर, वर्ष 1857 में कोलकाता, बम्बधई तथा मद्रास विश्व्विद्यालयों की स्थापपना की गई जिसके पश्चाकत वर्ष 1887 में इलाहाबाद विश्वलविद्यालय की स्था्पना हुई।

भारत में एक राष्ट्री य शिक्षा प्रणाली का निरुपण करने का प्रथम प्रयास वर्ष 1944 में किया गया जब भारत में पश्च युद्ध शै‍क्षणिक विकास संबंधी केंद्रीय परामर्शी शिक्षा बोर्ड की रिपोर्ट में एक विश्व विद्यालय अनुदान समिति का गठन करने की अनुशंसा की गई जिसका गठन अलीगढ़, बनारस तथा दिल्लीश के तीन केंद्रीय विश्वकविद्यालयों के कार्य की देखरेख करने के लिए 1945 में किया गया। स्व तंत्रता के पश्चा त, 29 अगस्त 1947 को एक पूर्ण विकसित शिक्षा मंत्रालय की स्था पना की गई।

वर्ष 1952 में केंद्रीय सरकार ने निर्णय किया कि लोक निधियों से केंद्रीय विश्व्विद्यालयों तथा उच्च2तर शिक्षा संस्था ओं को सहायतानुदान के आबंटन से संबंधित सभी मामले विश्वंविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को संदर्भित किए जाएं। भारत में विश्वेविद्यालयी शिक्षा के मानकों के समन्ववयन, निर्धारण तथा अनुरक्षण के लिए यूजीसी की औपचारिक स्थातपना संसद के एक अधिनियम के जरिए भारत सरकार के एक सांविधिक निकाय के रुप में नवम्बार 1950 में की गई थी। देश भर में प्रभावी क्षेत्रवार विस्ताकर सुनिश्चित करने के लिए यूजीसी ने पुणे, हैदराबाद, कोलकाता, भोपाल, गुवाहाटी तथा बैंगलोर में छ: क्षेत्रीय केन्द्री स्था,पित करके अपने प्रचालनों को विकेंद्रीकृत कर दिया है। यूजीसी का मुख्यातलय नई दिल्ली् में अवस्थित है।

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