उच्च शिक्षा

भारत में उच्च शिक्षा का विकास अंग्रेजी शासन-काल में ही प्रारम्भ हो गया था। उस समय से आज तक चलने वाली विश्वविद्यालयों की शिक्षा-व्यवस्था लन्दन का विश्वविद्यालयी व्यवस्था के अनुकरण पर चली आ रही हैं। स्वतन्त्रता की प्राप्ति के बाद उच्च शिक्षा-व्यवस्था में पर्याप्त प्रगति हुई। परन्तु यह प्रगति भारत की बड़ी जनसंख्या के अनुपात में बहुत ही कम हैं। 1947-48 ई. में उच्च शिक्षा-स्तर पर केवल एक लाख अस्सी हजार छात्र-छात्राऍ शिक्षा ग्रहण करते थे। आज भी पर्याप्त विश्वविद्यालय खुलने पर एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों की संख्या में वृद्धि होने पर भी सभी इच्छुक छात्रों को सुगमता से प्रवेश नहीं मिल पाता। इस कठिनाई को देखकर अनुमान लगाया जा सकता हैं कि भारतीय शिक्षा-व्यवस्था में उच्च शिक्षा-व्यवस्था कहाँ तक प्रसारित की जा सकी हैं।

भारत सरकार के अन्य स्तर की शिक्षाओं में विकास करने के साथ-साथ उच्च शिक्षा के विकास करने का भी प्रयत्न किया हैं। नवीन विश्वविद्यालयों एवं सम्बद्ध महाविद्यालयों की स्थापना की जा सकी हैं। 1985 ई. तक 10 वर्ष की अवधि में उच्च शिक्षा-स्तर के छात्र-छात्राओं की संख्या लगभग लवा छः लाख हो गयी थी। अब इस स्तर पर प्राथमिक, माध्यमिक शिक्षाओं की प्रगति के साथ उच्च शिक्षा-छात्रों की संख्या में पर्याप्त वृद्धि होती जा रही हैं।

A family that worships together, grows in faith together, and serves one another.

Your membership means more than simply signing a piece of paper. Becoming a member of Vishwakarma Samaj expresses your commitment to this spiritual family.