माध्यमिक शिक्षा

वे सभी कक्षाऍ जो प्राथमिक शिक्षा की समाप्ति के बाद एवं उच्च शिक्षा व्यवस्था की कक्षाओं से पूर्व व्यवस्थित की जाती हैं, माध्यमिक अथवा मध्यवर्ती कक्षाओं के अन्तर्गत आती हैं। सामान्यतः वर्ग-भेद को समाप्त करने के लिए शिक्षा-क्रम के तीन ही भाग होने चाहिए- प्राथमिक स्तर,एवं उच्च शिक्षा-स्तर। पर स्वतंत्र भारत में माध्यमिक कक्षाओं को विविध नामों की कक्षाओं में विभक्त कर लिया गया था और सम्पूर्ण भारत में वर्गीकरण की समानता नहीं मिलती थी। वर्नाक्यूलर मिडिल, हिन्दुस्तानी मिडिल, मैट्रिकुलेश्न, हाई स्कूल, एन्ट्रैन्स, इण्टरमीडिएट आदि विविध नाम माध्यमिक शिक्षा की विविध कक्षाओं को दिया जाता था। अब भी दो प्रकार के वर्गीकरण प्राप्त होते हैं, जैसे- लोअर सेकण्डरी, सेकण्डरी एवं हायर सेकण्डरी वर्गीकरण तथा जूनियर हाईस्कूल, हाईस्कूल अथवा मैट्रिकुलेश्न और इण्टरमीडिएट कक्षाओं का वर्गीकरण।

भारत में इण्टरमिडिएट कक्षाओं का वर्गीकरण करते हुए छठी कक्षा से 12वीं कक्षा तक माध्यमिक शिक्षा- स्तर स्वीकार किया गया था। परन्तु अब थोड़े परिवर्तन के साथ हायर सेकण्डरी योजना जो 11वीं कक्षा तक चलती हैं, स्वीकार की जाने लगी हैं। कक्षा 6 से 8 तक निम्न माध्यमिक, कक्षा 9 से 11 तक उच्चतर माध्यमिक कक्षाऍ स्वीकृत की गयी हैं। परन्तु इण्टरमीडिएट योजना के अनुसार हाई स्कूल परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद भी छात्रों को कोई न कोई व्यवसाय मिल जाता हैं। सरकार ने हाई स्कूल(10वीं कक्षा) को विविध प्रशिक्षणों की प्रवेश-योग्यता स्वीकार कर रखा हैं। इसलिए हायर सेकण्डरी योजना को अभी भारत के सभी प्रदेशों में लागू नहीं किया जा सका हैं।

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