इतवार व्रत कथा

मंगलवार सप्ताह का एक दिन है । यह सोमवार के बाद और बुधवार से पहले आता है । मंगलवार का यह नाम मंगल से पड़ा है जिसका अर्थ कुशल होता है, मंगल का अर्थ भगवान हनुमान से भी लगाया जाता है । पाकिस्तान में मंगलवार को मंगल कहते हैं ।

विधि

सर्व सुख, रक्त विकार, राज्य सम्मान तथा पुत्र की प्राप्ति के लिये मंगलवार का व्रत उत्तम है । इस व्रत में गेहूँ और गुड़ का ही भोजन करना चाहिये । भोजन दिन रात में एक बार ही ग्रहण करना ठीक है । व्रत 21 सप्ताह तक करें । मंगलवार के व्रत से मनुष्य के समस्त दोष नष्ट हो जाते है । व्रत के पूजन के समय लाल पुष्पों को चढ़ावें और लाल वस्त्र धारण करें । अन्त में हनुमान जी की पूजा करनी चाहिये । तथा मंगलवार की कथा सुननी चाहिये ।

कथा

एक ब्राहमण दम्पत्ति के कोई सन्तान न हुई थी, जिसके कारण पति-पत्नी दुःखी थे । वह ब्राहमण हनुमान जी की पूजा हेतु वन में चला गया । वह पूजा के साथ महावीर जी से एक पुत्र की कामना प्रकट किया करता था । घर पर उसकी पत्नी मंगलवार व्रत पुत्र की प्राप्ति के लिये किया करती थी । मंगल के दिन व्रत के अंत में भोजन बनाकर हनुमान जी को भोग लगाने के बाद स्वयं भोजन ग्रहण करती थी । एक बार कोई व्रत आ गया । जिसके कारण ब्रहमाणी भोजन न बना सकी । तब हनुमान जी का भोग भी नहीं लगाया । वह अपने मन में ऐसा प्रण करके सो गई कि अब अगले मंगलवार को हनुमान जी को भोग लगाकर अन्न ग्रहण करुंगी ।

वह भूखी प्यासी छः दिन पड़ी रही । मंगलवार के दिन तो उसे मूर्छा आ गई तब हनुमान जी उसकी लगन और निष्ठा को देखकर अति प्रसन्न हो गये । उन्होंने उसे दर्शन दिए और कहा – मैं तुमसे अति प्रसन्न हूँ । मैं तुझको एक सुन्दर बालक देता हूँ जो तेरी बहुत सेवा किया करेगा । हनुमान जी मंगलवार को बाल रुप में उसको दर्शन देकर अन्तर्धान हो गए । सुन्दर बालक पाकर ब्रहमाणी अति प्रसन्न हुई । ब्रहमाणी ने बालक का नाम मंगल रखा ।

कुछ समय पश्चात् ब्राहमण वन से लौटकर आया । प्रसन्नचित्त सुन्दर बालक घर में क्रीड़ा करते देखकर वह ब्राहमण पत्नी से बोला – यह बालक कौन है । पत्नी ने कहा – मंगलवार के व्रत से प्रसन्न हो हनुमान जी ने दर्शन दे मुझे बालक दिया है । पत्नी की बात छल से भरी जान उसने सोचा यह कुल्टा व्याभिचारिणी अपनी कलुषता छुपाने के लिये बात बना रही है । एक दिन उसका पति कुएँ पर पानी भरने चला तो पत्नी ने कहा कि मंगल को भी साथ ले जाओ । वह मंगल को साथ ले चला और उसको कुएँ में डालकर वापिस पानी भरकर घर आया तो पत्नी ने पूछा कि मंगल कहाँ है ।

तभी मंगल मुस्कुराता हुआ घर आ गया । उसको देख ब्राहमण आश्र्चर्य चकित हुआ, रात्रि में उसके पति से हनुमान जी ने स्वप्न में कहे – यह बालक मैंने दिया है । तुम पत्नी को कुल्टा क्यों कहते हो । पति यह जानकर हर्षि हुआ । फिर पति-पत्नी मंगल का व्रत रख अपनी जीवन आनन्दपूर्वक व्यतीत करने लगे । जो मनुष्य मंगलवार व्रत कथा को पढ़ता या सुनता है और नियम से व्रत रखता है । उसके हनुमान जी की कृपा से सब कष्ट दूर होकर सर्व सुख प्राप्त होता है ।

आरती

        आरती कीजै हनुमान लला की । दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ।।
        जाके बल से गिरिवर कांपै । रोग-दोष जाके निकट न झांपै ।।
        अंजनि पुत्र महा बलदाई । संतन के प्रभु सदा सहाई ।।
        दे बीरा रघुनाथ पठाए । लंका जारि सिया सुधि लाये ।।
        लंका सो कोट समुद्र सी खाई । जात पवनसुत बार न लाई ।।
        लंका जारि असुर सब मारे । सियाराम जी के काज संवारे ।।
        लक्ष्मण मूर्च्छित पड़े सकारे । लाय संजीवन प्राण उबारे ।।
        पैठि पताल तोरि जमकारे । अहिरावण की भुजा उखारे ।।
        बाईं भुजा असुर संहारे । दाईं भुजा संत जन तारे ।।
        सुर नर मुनि आरती उतारें । जय जय जय हनुमान उचारें ।।
        कंचन थार कपूर लौ छाई । आरति करत अंजना माई ।।
        जो हनुमान जी की आरती गावे । बसि बैकुण्ठ परमपद पावे ।।
        लंक विध्वंस किए रघुराई । तुलसिदास प्रभु कीरति गाई ।।
    

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