आप सभी का स्वागत है

महाराष्ट्र राज्य शासकीय जनगणना २०११ के अनुसार केवल महाराष्ट्र मे विश्वकर्मा वंश की लोकसंख्या १,७२,२८.०८२ (एक करोड बाहत्तर लाख आठठीस हजार बयासी) और सिर्फ सुतार ५८,५९,८४२ (अठ्ठावन्न लाख उनसाठ हजार आठ सौ बयालीस) इतनी है। लेकिन हम सब अलग अलग जिलों में तुकडो में और बहुत सारे संघटनों में बटें हुए हैं। हर जिला के अनुसार सबकी समस्या अलग अलग है। मगर सभी जगह आपसी मतभेद एक जैसे ही है, जिसकी वजह से हम संगठित नहीं हो पा रहे है और अपने अस्तित्व कि लढाई लढ पा रहे हैं। इसलिये सरकारी दरबार में हमारी किमत जीरो है। लेकिन अब ये चित्र बदलना है और इसका पहला कदम है "प्रभू श्री विश्वकर्मा रथयात्रा" (विश्वकर्मा वंशीय समाज जनजागृती अभियान २०१५).

समस्त विश्वकर्मीय समाज बंधू-भगिनी, हम २१ वीं सदी से गुजरते हुये समाज कि आर्थिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक स्तर बढाना उसके प्रती हमारा कर्तव्य, हमारी कोशिश को एक हक्क का व्यासपीठ होना चाहिये और वह इस रथयात्रा के माध्यम से हमें तैयार करना है। विश्व निर्माता प्रभू श्री विश्वकर्मा जी के महत्व को अपने समाज के साथ साथ बाकी समाज को भी अवगत करा देना है। इस लिये "न् भूतो न् भविष्यती" ऐसी ऐतिहासिक "प्रभू श्री विश्वकर्मा रथयात्रा" आयोजन किया है। "नई सोच, नई उम्मीद" इस पंक्ती की तऱह नई उम्मीद जगाने के लिये नई सोच होनी चाहिये। इसलिये पहली बार नई सोच के साथ "प्रभू श्री विश्वकर्मा रथयात्रा" का आयोजन किया गया है।

प्रभु श्री विश्वकर्मा रथयात्रा का उद्देश्य

विश्वकर्मा समाज में बहुत सारी समस्याएं हैं। कुछ से लोग अवगत हैं और कुछ से नहीं। हमें उन सभी समस्याओं को जानना है और समाज की जवान पिढी को सक्षम बनाना है। उनका शैक्षणिक स्तर बढाकर शासन व सुविधाओंका लाभ लेना है। विश्व में हम किसी से काम नहीं ये दिखाना हैं। हम अपने आप को सिर्फ कारागीर कहकर, खुद की कीमत स्वयं ही कम करते लेते हैं। इस सोच को बदलना है, हम कारागीर के साथ एक कलाकार है, निर्माणकर्ता हैं। हम जन्मजात इंजिनियर है। कहते है "नजर बदलो, नजारे बदल जायेंगे" इसी कोशिश का पहला कदम है "प्रभू श्री विश्वकर्मा रथयात्रा"। समाज के प्रती अपनी आस्था, निष्ठा, कर्तव्य को निभाते हुये समाज को नई आशा के साथ नई दिशा देनी है। समाज को विश्व के नक्शे पर स्थान देना है तो, "श्री प्रभू विश्वकर्मा रथयात्रा" का प्रचार-प्रसार जोरशोर से करना है, और आप सब करेंगे इसमे कोई शंका नहीं। आप सभी से निवेदन है कि इस रथयात्रा से जुडे और इतिहास बनाये .....हाथो से हाथ मिलाये कदमो से मिलाये कदम !! पत्थर को भी पूज्य बना दे हम मे है वो दम !! हम वो कर गुजर जायेंगे कि विश्वकर्मा समाज का गर्व महसूस होगा।

संगठित बनो ! शक्तिशाली बनो ! इस मूलमंत्र को याद रखते हुये पंढरपूर (महाराष्ट्र) में समाज के संतबंधू जलोजी-मलोजी आश्रम के सामने जो पिछले २० साल से अतिक्रमण था उसे हटाने के लिये श्री नागोजीराव पांचाल सर इन्होने अनशन किया। लेकिन कुछ भी नाही हुआ तो, महाराष्ट्र के सभी जिल्हो से ३००० (तीन हजार) समाज बंधू जमा होकार उस अतिक्रमण को तोड डाला। ये अपनी समाज के संगठन की ताकत थी। इस आंदोलन के द्वारा प्रज्वलित हुयी ये चिंगारी "श्री प्रभू विश्वकर्मा रथयात्रा" के माध्यम से क्रांतीज्योत (मशाल) मे परिवर्तित करनी है, और क्रांती करने के लिये जवान पिढी को आगे बढकर हिस्सा लेना चाहिये। समाज को एक नई दिशा देने के कार्य मे आपना योगदान देने का ये सुनहरा मौका है। इतिहास गवाह है जब जब क्रांती होती है समाज कि दिशा बदल जाती है इसलिये अपना नारा है "जय विश्वकर्मा, जय क्रांती" आओ क्रांतिकारी बने ....

रथ यात्रा शहर के विवरण

प्रभु श्री विश्वकर्मा रथयात्रा राज्य कार्यकारिणी समिती

मा. पुरुषोत्तम चौधरी
मा. पुरुषोत्तम चौधरी
मा. नरहरी पांचाळ
मा. नरहरी पांचाळ
मा. दिलीप सोनवणे
मा. दिलीप सोनवणे
अनिल विश्वकर्मा
अनिल विश्वकर्मा
मा. राजेन्द्र भालेराव
मा. राजेन्द्र भालेराव
मा. सत्यप्रकाश अधवलकर
मा. सत्यप्रकाश अधवलकर
मा. बाळासाहेब सुतार
मा. बाळासाहेब सुतार

Mr. Nagorao Panchal

npanchal6999@gmail.com

09011440606, 07385440460

प्रभु श्री विश्वकर्मा रथयात्रा राज्य कार्यकारिणी समिती

श्री पुरषोत्तम चौधरी (रथयात्रा कार्यकारी नियंत्रक), श्री नरहरी पांचाल (रथयात्रा दौरा प्रमुख), श्री शिवाजी सुतार (रथयात्रा दौरा सहप्रमुख) श्री राजेन्द्र भालेराव (प्रसिद्धी प्रमुख)

श्री संदीप सुतार, श्री विवेक सुतार, श्री सुधाकर भालेराव, श्री बालासाहेब सुतार, श्री चंद्रकांत पांचाल, श्री दिलीप सोनवणे, श्री बालासाहेब चंदने, श्री महादेव सुतार, श्री हेमंत मिस्त्री, श्री प्रमोद वेलकर, श्री सोमनाथ भागवत, श्री मनोहर सोनवणे

सोशल मिडिया प्रसिद्धी टीम : अनिल विश्वकर्मा, सत्यप्रकाश अढवलकर, अमोल सांगोळे, ज्ञानेश्वर साखरे, विजय गव्हाणकर

रथ यात्रा के अंतर्गत आने वाले गाँव

परभणी, गंगाखेड, परणी वैजनाथ, अंबाजोगाई, कलम्ब, ढोकी, उस्मानाबाद, तुळजापुर, वैराग, मोहळ, पंढरपुर, मसवाड़, दहीवड़ी, पुसेगाँव, कोरेगाँव, सातारा, उमरज, कराड, इसमापुर, वडगाँव, कोल्हापुर, कागल, निपाणी, शंकेश्वर, गडहिंग्लज, अजरा, अम्बोली, सावंतवाड़ी, कुराळ, सिंधुदुर्ग नगरी, कडकवली, राजापुर, लांजे, पाली, हाथखम्बा, रत्नागिरी, निवडी, चिपळून, भरनेफाटा, पोलादपुर, महाड, मानगाँव, वाकण, पेण, पनवेल, नवी मुंबई, खालापुर, लोणावळा, चाकण, आरंदी, मंचर, नारायणगाँव, आळेफाटा, डोळासन, संगमनेर, सिन्नर, नाशिक, दिंडोरी, वणी, कळवण, देवळा, सटाण, मालेगाँव, आर्वी, धुळे, पारोळा, एरंडोल, जलगाँव, भुसावाळ, मुक्ताईनगर, मलकापुर, नांदुर, खामगाँव, बाळापुर, आकोला, मुर्तिजापुर, अमरावती, तिवसा, कारंजा, नागपुर, उमरेड, चिमूर, अंधारी, चंद्रपुर, धुगूस, वनी, पांढरकवडा, पाटनबोरी, आदिलाबाद, किनवट, उमरखेड, वाशीम, रिसोड, मेहकर, लोणार, मंठा, वाटूर फाटा, जालना, बदनापूर, औरंगाबाद, वेरूळ

प्रमुख मार्गदर्शक

मा. आ. संजयजी रायमुलकर (बुलढाणा), मा. ज्ञानेश्वरजी भालेराव (पुणे), मा. बिपिन सुतार, नारायण शेलार, हिरामण निकुंभ, नारायण क्षीरसागर, आनंदराव सूर्यवंशी, श्याम विश्वकर्मा (नाशिक), मा. विष्णुपंत मुर्हेकर, दिलीप अकोटकर, रामकृष्ण दिक्षित, नागनाथराव देशमुख, शिवाजीराव पांचाल, रमेश दाउसकर (नागपूर), मा. सुदाम (आण्णा) खैरनार, चंद्रकांत (बापू) गवळी (मालेगाव), मा. के.डी.(आप्पा) मिस्त्री, पी. जी. सुतार, प्रदीप सोनवणे, कैलास मित्री (धुळे), मा. गंगारामजी विश्वकर्मा, हेमंत मिस्त्री, अशोक कुमार (मुंबई), मा. इंद्रबहादूर सिंह विश्वकर्मा, प्रेम बहादूर विश्वकर्मा, मोतीराम विश्वकर्मा (नेपाली बंधू), मा. आत्मानंद थोरात, राजेश वेलणकर, हरिश्चंद्र पांचाल, कालीदास्राव पांचाल, सुनील पांचाल, बापूराव भालेकर, रमेश खेडकर, के. डी. गवळी मा. मिलिंदराव आढवळकर, रेणुकादास पांचाल, नानासाहेब गरुड, अशोकराव सुरसे, शिवानंद मिलगिरे, शंकरराव डीगरकर, अशोकराव पगार मा. छबुराव आगलावे, सुरेश आगलावे, उद्धवराव थोराइत, बाबुराव पांचाल, गंगाधरराव पांचाल, निवृत्ती पांचाल, शिवराम पांचाल मा. मच्छिंद्र जाधव, भाऊसाहेब शिंदे, संजय सूर्यवंशी, वाल्मिक सुरासे, पंजाबराव गव्हाणकर, आर.ए. भागवतकार, भगवानराव राउत